राजा बलवन्त सिंह कालेज, आगरा से वर्ष 1971 में मास्टर आफ साइंस (M.Sc.) वनस्पति विज्ञान से करने के बाद उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण, विभाग में वर्ष 1971 में ज्येष्ठ शोध सहायक के पद पर पर्वतीय फल शोध केन्द्र चौबटिया, रानीखेत में अपना योगदान दिया।

उद्यान विभाग में विभिन्न पदों यथा ज्येष्ठ शोध सहायक, वेजिटेबल ब्रीडर, पोटेटो ब्रीडर, मुख्य उद्यान विशेषज्ञ पर कार्य करते हुए जिला उद्यान अधिकारी के पद से वर्ष 2008 में सेवानिवृत्त हुआ।

राजकीय सेवा काल में वर्ष 1980 में कुमाऊं विश्वविद्यालय से वनस्पति विज्ञान में डाक्टर आफ फिलासफी Ph.D. की उपाधि प्राप्त की साथ ही कई प्रतिष्ठित शोध संस्थानों से औदयानिक फसलों पर प्रशिक्षण प्राप्त किया:
  1. Breeding and Seed production of temperate vegetable crops- 5 June to 24 June 1995. Dr. Y.S. Parmar, University of Horticulture and Forestry, Department of vegetable crops, Solan H.P.
  2. Nursery Management and production technology of temperate fruits – 2 October to 27 November 2002. Dr. Y.S.Parmar, University of Horticulture and Forestry, Nouni Solan H.P.
  3. Capacity Building workshop for officials of plantation and Horticulture department, Govt. of U.A. 4-12-2002 by NABARD.
  4. Intensive cultivation of vegetables under different growing condition-15 January to 5 February 2003. Indo Israel Project on R & D and demonstration Farm Indian Agricultural Research Institute, New Delhi.

अभी तक चालीस से अधिक शोध-पत्र एवं लेख विभिन्न राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय जर्नल एवं पत्रिकाओं में प्रकाशित हुए।

सेवा निवृत्ति के बाद ग्राम्या में कृषि उद्यान विशेषज्ञ, मनरेगा में लोकपाल, एकीकृत आजीविका सहयोग परियोजना (IFAD-ILSP) उत्तराखण्ड ग्राम्य विकास समिति (UGVS), रिलायंस फाउंडेशन उत्तराखण्ड, सेवा इन्टरनेशनल उत्तराखण्ड आदि संस्थाओं में वरिष्ठ सलाहकार के रूप में सेवायें दी, वर्तमान में कृषि/उद्यान स्वतंत्र सलाहकार के रूप में सेवा दे रहे हैं।