डॉ. राजेन्द्र कुकसाल, 31 जनवरी, 2026ः सब्जियों में विशेष रूप से लौकी, खीरा, तोरई, करेला, भिंडी, मिर्च आदि फसलों में फल टेढ़े-मेढ़े दिखाई देना एक सामान्य समस्या है। इसके कारण किसानों को बाजार में उपज का उचित मूल्य नहीं मिल पाता और आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।
सब्जियों के फल टेढ़े-मेढ़े होने के प्रमुख कारणों में बोरॉन एवं कैल्शियम जैसे सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी, तापमान में अचानक परिवर्तन, मिट्टी की खराब भौतिक स्थिति, अपर्याप्त परागण तथा जल जमाव शामिल हैं।
1 पोषक तत्वों की कमी:
मिट्टी में कुछ आवश्यक पोषक तत्वों, विशेषकर बोरॉन की कमी होने पर फल टेढ़े-मेढ़े हो जाते हैं। यह समस्या खीरा, लौकी, करेला एवं तोरई जैसी फसलों में अधिक देखी जाती है। बोरॉन की कमी से फलों की वृद्धि रुक जाती है, फूल झड़ने लगते हैं तथा फल कम लगते हैं। बोरॉन की कमी के लक्षण सर्वप्रथम नई पत्तियों में दिखाई देते हैं। पत्तियाँ ऊपर की ओर मुड़ जाती हैं, कटोरीनुमा आकार ले लेती हैं तथा उनकी सतह खुरदरी हो जाती है।

उपाय: बोरॉन की कमी के लक्षण दिखाई देते ही 20 प्रतिशत बोरोन को 3–4 ग्राम प्रति लीटर पानी की दर से घोल बनाकर पौधों पर छिड़काव करें। 10 दिन बाद पुनः छिड़काव करें। यदि खेत में बोरॉन की कमी हो तो अंतिम जुताई के समय 14.5 प्रतिशत बोरोन 10 किलोग्राम प्रति एकड़ (लगभग 500 ग्राम प्रति नाली) की दर से मिट्टी में मिलाएं।
2 परागण की कमी:
अपर्याप्त परागण भी फलों के टेढ़े-मेढ़े होने का एक प्रमुख कारण है। जब फूलों का पूर्ण परागण नहीं हो पाता, तो फल असमान रूप से विकसित होते हैं, क्योंकि अंडाशय की दीवार केवल निषेचित बीजों के आसपास ही बढ़ती है। यह समस्या मधुमक्खियों एवं अन्य परागण कीटों की कमी या प्रतिकूल मौसम के कारण होती है।
उपाय: उचित परागण सुनिश्चित करने के लिए फसल पर या आसपास रासायनिक कीटनाशकों का प्रयोग न करें, जिससे मधुमक्खियों का आवागमन बना रहे। परागण करने वाले कीड़ों को आकर्षित करने के लिए खेत या बगीचे में फूलदार पौधे लगाएं। आवश्यकता पड़ने पर हाथ से परागण भी किया जा सकता है। खीरा जैसी फसलों में कम तापमान पर पराग उत्पादन तथा मधुमक्खियों की गतिविधि कम हो जाती है, जिससे फल टेढ़े हो सकते हैं।
3 कीट एवं फल मक्खी का प्रकोप:
छोटे फलों पर कीट या फल मक्खी के आक्रमण से फल बड़े होने पर असामान्य आकार के हो जाते हैं।
उपाय: फल मक्खी ट्रैप का प्रयोग करें तथा कीटों के नियंत्रण के लिए जैविक अथवा अनुशंसित रासायनिक उपाय अपनाएं।
4.मौसम की स्थिति:
तापमान में अचानक उतार-चढ़ाव, अत्यधिक गर्मी या ठंड पौधों में तनाव उत्पन्न करती है, जिससे फल विकृत हो जाते हैं।
उपाय: पौधों को अत्यधिक गर्मी, ठंडी हवाओं तथा अनियमित सिंचाई से बचाएं। खेत में जल निकास की उचित व्यवस्था रखें और समय पर सिंचाई करें।
