डॉ. राजेंद्र कुकसाल, 10 फरवरी, 2026ः उद्यान कार्ड बागवानों के लिए एक महत्वपूर्ण पंजीकरण प्रमाण-पत्र है। इस कार्ड के माध्यम से बागवानों को उद्यान विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं एवं अनुदान (Subsidy) का लाभ प्राप्त होता है। उद्यान कार्ड बनवाने के लिए बागवानों को उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग में पंजीकरण कराना आवश्यक होता है। इसके लिए कुछ आवश्यक दस्तावेज़ विभाग में जमा करने होते हैं।
उद्यान कार्ड आवेदन हेतु आवश्यक दस्तावेज़-
1 आधार कार्ड।
2 खसरा-खतौनी (भूमि अभिलेख)।
3 पासपोर्ट साइज फोटो।
4 बैंक पासबुक के प्रथम पृष्ठ की छायाप्रति।
5 लघु/सीमान्त कृषक (2 हेक्टेयर से कम भूमि) हेतु शपथ पत्र।
6 पंजीकरण के समय आधार से जुड़ा मोबाइल नंबर।
7 बागवानी का विवरण—यदि आप फल उत्पादन करते हैं तो बाग/पेड़ों की स्थिति का विवरण एवं फोटो।
उद्यान कार्ड के लाभ-
उद्यान कार्ड के माध्यम से बागवानों को उद्यान विभाग की योजनाओं का लाभ प्राप्त होता है। इसके अंतर्गत फल पौध, सब्ज़ी बीज, अदरक, हल्दी, लहसुन बीज, दवाइयां, स्प्रे मशीन आदि कई प्रकार की सहायता उपलब्ध कराई जाती है।
इसके अतिरिक्त भारत सरकार की योजनाओं जैसे—
पर ड्रॉप मोर क्रॉप,
माइक्रो इरीगेशन,
एकीकृत बागवानी विकास मिशन (MIDH),
राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (RKVY)
आदि का लाभ भी उद्यान कार्ड के माध्यम से लिया जा सकता है।
उद्यान विभाग विभिन्न योजनाओं में बागवानों को अनुदान (Subsidy) पर फल पौध, सब्जी बीज, अदरक, हल्दी, लहसुन, आलू बीज, दवाइयां, स्प्रे मशीन सहित कई प्रकार के निवेश एवं उपकरण उपलब्ध कराता है। योजनाओं में अनुदान पर दिए गए निवेशों का संबंधित बागवान के उद्यान कार्ड में अंकित होना अनिवार्य है।
उद्यान कार्ड में निवेश की प्रविष्टि (Entry) क्यों जरूरी है?
जिन किसानों ने अभी तक उद्यान कार्ड नहीं बनवाया है, उनसे अनुरोध है कि वे अपने नजदीकी उद्यान सचल दल केन्द्र के प्रभारी से संपर्क कर अपना उद्यान कार्ड अवश्य बनवाएं।
साथ ही योजनाओं के अंतर्गत प्राप्त निवेश—जैसे फल पौध, सब्जी बीज, अदरक, हल्दी, लहसुन, आलू बीज, दवाइयां, खाद आदि—की एंट्री उद्यान कार्ड में अनिवार्य रूप से करवाएं और उद्यान कार्ड अपने पास सुरक्षित रखें। इससे योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता आएगी।
अन्य राज्यों का उदाहरण और उत्तराखंड की स्थिति-
हिमाचल प्रदेश में विगत लगभग दस वर्षों से योजनाओं के अंतर्गत अनुदान पर दिए जाने वाले निवेशों की एंट्री उद्यान कार्ड में अनिवार्य (Mandatory) की गई है।
जबकि उत्तराखंड में किसानों का कहना है कि योजनाओं के तहत दिए जाने वाले सामान की केवल एक रजिस्टर में नाम लिखकर हस्ताक्षर करवा लिए जाते हैं तथा मोबाइल नंबर भी दर्ज कर लिया जाता है। कई बार यह स्पष्ट नहीं होता कि वास्तव में कौन-सा और कितना सामान दिया गया। किसानों के अनुसार कई मामलों में कम सामान दिया जाता है लेकिन कागजों में अधिक दिखाया जाता है। कुछ किसानों का आरोप है कि कई बार सामग्री विभागीय कर्मचारियों द्वारा बाजार में बेच दी जाती है।
उद्यान कार्ड से जवाबदेही और किसान का अधिकार सुरक्षित होता है-
यदि निवेश की प्रविष्टि उद्यान कार्ड में की जाएगी तो उद्यान विभाग की जवाबदेही सुनिश्चित होगी।साथ ही भविष्य में यदि फल पौध या बीज आदि निम्न गुणवत्ता के निकलते हैं, तो किसान उपभोक्ता फोरम या नर्सरी एक्ट के तहत क्षतिपूर्ति (Compensation) का दावा अधिक आसानी से कर सकते हैं। यदि उद्यान कार्ड में निवेश की एंट्री नहीं होगी, तो क्षतिपूर्ति का दावा प्रस्तुत करने में किसानों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है दुर्भाग्यवश कई बार अपनी जवाबदेही से बचने के लिए कुछ विभागीय कर्मचारी उद्यान कार्ड में एंट्री नहीं करते, जिससे किसान को नुकसान उठाना पड़ता है।
अतः सभी बागवानों से अनुरोध है कि वे अपना उद्यान कार्ड अवश्य बनवाएं तथा योजनाओं के अंतर्गत प्राप्त सभी निवेशों की एंट्री उद्यान कार्ड में अनिवार्य रूप से करवाएं।
