माल्टा-संतरा की पौध कैसे तैयार करें

Rajendra Kuksal
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डॉ. राजेन्द्र कुकसाल, देहरादून, 16 जनवरी, 2026: मातृ वृक्षों की तरह गुणवत्तायुक्त उपज तथा शीघ्र फल प्राप्त करने हेतु (कलमी पौधे) वानस्पतिक प्रवर्धन द्वारा तैयार पौधों को लगाने की संस्तुति की जाती है। वैज्ञानिकों द्वारा पर्वतीय क्षेत्रों में नींबू वर्गीय फलों के न्यूसेलर सीडलिंग लगाने की भी संस्तुति की जाती है। नींबू वर्गीय फलों (माल्टा, संतरा, गलगल आदि) के न्यूसेलर सीडलिंग बीजों से तैयार पौधों से True to the type अर्थात् मातृ वृक्ष के समान गुणवत्ता-युक्त उपज प्राप्त की जा सकती है।

अधिकांश सिट्रस प्रजातियाँ बहुभ्रूणी (Polyembryonic) होती हैं, अर्थात एक बीज से 2–3 या उससे अधिक भ्रूण निकलते हैं। इनमें से केवल एक भ्रूण लैंगिक (Zygotic) होता है, जबकि शेष भ्रूण न्यूसेलस की कोशिकाओं से बनते हैं, जिन्हें न्यूसेलर सीडलिंग कहा जाता है। न्यूसेलर सीडलिंग आनुवंशिक रूप से मातृ वृक्ष के समान होते हैं।

लैंगिक (Zygotic) पौधों की बढ़वार कम होती है और वे अपेक्षाकृत छोटे रह जाते हैं, जबकि न्यूसेलर सीडलिंग समान स्वभाव के तथा अच्छी बढ़वार वाले होते हैं।

कृषि विज्ञान केंद्र, जाखधार (रुद्रप्रयाग) के वैज्ञानिकों द्वारा माल्टा व नारंगी के न्यूसेलर सीडलिंग वाले पौधे तैयार किए जाते हैं। यह प्रयास अन्य कृषि विज्ञान केंद्रों, राजकीय उद्यानों एवं स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा भी किया जा सकता है।

न्यूसेलर सीडलिंग के पौधे कैसे तैयार करें

स्वस्थ एवं अच्छी गुणवत्ता वाले फलों का उत्पादन करने वाले माल्टा/संतरे के पौधों का चयन करें। चयनित पौधों से दिसंबर–जनवरी माह में, जब फल पूर्ण रूप से तैयार हो जाएँ, बड़े आकार के आकर्षक स्पेशल ग्रेड फलों को तोड़कर अलग कर लें। इन फलों को उपयोग में लाते समय बीज अलग कर लें। यदि जूस निकालना हो तो जूस निकालने के बाद गूदे से बीज निकालें और यदि फल काटकर खाना हो तो काटने के बाद बीज अलग करें।

सिट्रस के बीजों में कोई सुषुप्तावस्था (Dormancy) नहीं होती, इसलिए इन्हें ताज़ा ही बोया जाता है। सुखाने पर इनकी अंकुरण क्षमता कम हो जाती है। यदि बीजों को बोने के लिए दूर भेजना हो, तो उन्हें गूदे या जूस में डुबोकर ही भेजें। स्वस्थ बीजों का चयन कर शीघ्र ही तैयार नर्सरी में बुवाई करें।

नर्सरी की तैयारी

  • 2 भाग बगीचे की मिट्टी
  • 1 भाग रेत 1 भाग गोबर की खाद (जिसमें ट्राइकोडर्मा कल्चर मिला हो) इन सबको अच्छी तरह मिलाएँ।
  • बीजों को कतारों में समान दूरी पर 2–3 सेमी गहराई पर बोएँ। बुवाई के समय नर्सरी में नमी होना आवश्यक है।
  • बीज बोने के तुरंत बाद क्यारियों को पुआल या घास से ढक दें और फुवारे से सिंचाई करें। उचित देखभाल के बाद मार्च–अप्रैल में बीज अंकुरित होने लगते हैं।
  • अप्रैल के अंतिम सप्ताह में, जब पौधे 2–3 इंच ऊँचे हो जाएँ, तो उन्हें नर्सरी से निकालकर उसी क्यारी में या किसी अन्य स्थान पर पुनः रोपित किया जा सकता है।
  • पौध निकालते समय आप पाएँगे कि एक ही बीज से 2–3 पौधे निकले हैं। इनमें से एक कमजोर लैंगिक (Zygotic) पौधा होता है, जिसे हटाकर नष्ट कर देना चाहिए। शेष मजबूत पौधों का ही रोपण करें।

इस प्रकार आप नींबू वर्गीय फलों के बीजों से न्यूसेलर सीडलिंग तैयार कर सकते हैं, जिनके गुण आनुवंशिक रूप से मातृ वृक्ष के समान होते हैं।

मुख्य बिंदु:

  • बहुभ्रूणता (Polyembryony): सिट्रस के एक बीज से कई पौधे निकलते हैं। इनमें से न्यूसेलर पौधे आनुवंशिक रूप से बिल्कुल अपनी ‘मातृ वृक्ष’ (Mother Plant) के समान होते हैं।

  • पहचान: कमजोर लैंगिक (Zygotic) पौधों को हटाकर केवल स्वस्थ न्यूसेलर पौधों का ही रोपण करना चाहिए।

  • बुवाई: बीजों को सुखाना नहीं चाहिए; ताजे बीजों को दिसंबर-जनवरी में निकालकर तुरंत नर्सरी में बोना चाहिए।

  • लाभ: यह तकनीक कलमी पौधों की तरह ही गुणवत्तायुक्त और शीघ्र फल देने वाली फसल सुनिश्चित करती है।

 

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