आड़ू का पर्ण कुंचन रोग (Peach Leaf Curl) का कारण और उपचार बता रहे डॉ. कुकसाल

Gemini said डॉ. राजेंद्र कुकसाल द्वारा लिखित यह लेख आड़ू में पर्ण कुंचन (Peach Leaf Curl) रोग के प्रबंधन पर एक विस्तृत मार्गदर्शिका है। इसमें रोग के जैविक कारणों, लक्षणों और बोर्डो मिश्रण तैयार करने की विधि सहित रासायनिक और जैविक नियंत्रण उपायों की सटीक जानकारी दी गई है।

Rajendra Kuksal
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डॉ. राजेंद्र कुकसाल, 10 फरवरी, 2026ः आड़ू में पर्ण कुंचन रोग एक गंभीर फफूंदजनित रोग है। इस रोग में पत्तियाँ असामान्य रूप से बड़ी, मुड़ी हुई तथा पीले एवं लाल रंग के फफोलेदार धब्बों से युक्त हो जाती हैं। रोग की तीव्र अवस्था में पत्तियाँ, फूल एवं फल समय से पहले झड़ने लगते हैं। यदि समय पर उपचार न किया जाए, तो रोग बहुत तेजी से फैलता है और कमजोर पौधे सूख भी सकते हैं। यह रोग मुख्यतः वसंत ऋतु में, जब मौसम ठंडा एवं आर्द्र (अधिक नमी वाला) होता है, पर्वतीय क्षेत्रों में अधिक पाया जाता है। इस रोग का प्रमुख कारण टैफरिना डिफॉर्मेन्स (Taphrina deformans) नामक फफूंद है।

रोग की रोकथाम एवं उपचार

संक्रमित भागों की छंटाई- रोग दिखाई देते ही संक्रमित पत्तियों एवं टहनियों को शीघ्र काटकर बगीचे से बाहर निकालकर नष्ट कर दें।

कॉपर ऑक्सीक्लोराइड का छिड़काव – कॉपर ऑक्सीक्लोराइड (ब्लाइटॉक्स) तीन ग्राम दवा प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें।पहला छिड़काव- पत्तियों के पतझड़ के बाद (दिसम्बर/जनवरी)दूसरा छिड़काव – ग्रीन टिप एवं पिंक बड अवस्था में, जब पत्ती की कलियाँ फूट रही हों और फूल आने से पहले

बोर्डो मिश्रण का प्रयोग- बोर्डो मिश्रण का भी एक छिड़काव पत्तियों के पतझड़ के बाद (दिसम्बर/जनवरी) तथा दूसरा छिड़काव पिंक बड अवस्था में फूल आने से पूर्व करना चाहिए।

सल्फर एवं गोमूत्र का छिड़काव

पिंक बड अवस्था में कॉपर ऑक्सीक्लोराइड अथवा बोर्डो मिश्रण के छिड़काव के कुछ दिनों बाद सल्फर एवं गोमूत्र का छिड़काव लाभकारी पाया गया है।

चूसक कीटों का नियंत्रण

यह रोग एफिड (माहू) एवं अन्य चूसक कीटों द्वारा फैलता है। अतः प्रारंभिक अवस्था (पिंक बड स्टेज) में क्यूनालफॉस, इमिडाक्लोप्रिड या क्लोरपाइरीफॉस में से किसी एक दवा का 2 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें।

बोर्डो मिश्रण बनाने की विधि

80 ग्राम नीला थोथा (कॉपर सल्फेट) को 5 लीटर पानी में अलग से घोलें। 80 ग्राम अनबुझा चूना को 5 लीटर पानी में अलग से घोलें।अब दोनों घोलों को धीरे-धीरे एक साथ उड़ेलते हुए तीसरे बर्तन में मिलाएँ और लकड़ी की छड़ी से अच्छी तरह घोलें। यही बोर्डो मिश्रण है।

ध्यान रखने योग्य बातें

बोर्डो मिश्रण बनाने हेतु काँच, मिट्टी या प्लास्टिक के बर्तनों का ही प्रयोग करें, ताकि नीले थोथे में उपस्थित तांबा धातु के बर्तन से प्रतिक्रिया न करे।

मिश्रण तैयार होने के बाद उसकी अम्लता की जाँच आवश्यक है।

अम्लता परीक्षण की विधि- एक साफ और तेज धार वाले चाकू को मिश्रण में कुछ समय के लिए डुबोकर बाहर निकालें। यदि चाकू की धार पर लाल-भूरे रंग की परत जम जाए, तो समझें कि मिश्रण अम्लीय है। ऐसी स्थिति में मिश्रण में और चूना मिलाकर उसे संतुलित करें।

हमेशा ताजा बना हुआ बोर्डो मिश्रण ही प्रयोग में लाएँ।

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