डॉ. राजेन्द्र कुकसाल, 19 जनवरी, 2026: मिट्टी में मौजूद सूक्ष्मजीवों की आबादी ही मृदा के स्वास्थ्य को निर्धारित करती है। पहले मृदा को एक निर्जीव भौतिक वस्तु माना जाता था, किंतु वास्तव में मृदा एक जीवित, क्रियाशील तंत्र है, जिसके अपने जैविक, रासायनिक और भौतिक गुण होते हैं। इनमें से किसी एक में भी परिवर्तन होने से मृदा के मूलभूत स्वरूप एवं स्वभाव में बदलाव आ जाता है। मृदा स्वास्थ्य पोषण सुरक्षा का एक मूलभूत घटक है। यह उत्पादित आहार की गुणवत्ता और मात्रा दोनों को प्रभावित करता है।
मृदा में बहुत छोटे-छोटे सूक्ष्मजीव होते हैं जिन्हें हम आँखों से नहीं देख सकते। एक ग्राम मिट्टी में इनकी संख्या करोड़ों में होती है। सूक्ष्मजीव मुख्यतः बैक्टीरिया, फफूँद, एक्टिनोमाइसेट्स, शैवाल, प्रोटोजोआ और वायरस आदि होते हैं। ये जीव मिट्टी की उर्वराशक्ति को बढ़ाते हैं तथा टिकाऊ कृषि के लिए आवश्यक हैं। यदि हमारे खेत में सूक्ष्मजीव अधिक हैं, तो निश्चित रूप से मिट्टी की उर्वराशक्ति भी अच्छी होगी।
मृदा में सूक्ष्मजीवों की सक्रियता के लिए जीवांश पदार्थों की उपस्थिति, नमी, वायु संचार तथा लगभग उदासीन pH मान आवश्यक है। ये चारों आवश्यकताएँ जैविक खाद से पूरी की जा सकती हैं। उपजाऊ मिट्टी में जैविक कार्बन की न्यूनतम मात्रा 0.9% आवश्यक मानी जाती है।
सूक्ष्मजीवों के लाभ
1जैविक पदार्थों का विघटन एवं ह्यूमस निर्माण
खेत में डाले गए गोबर की खाद, कम्पोस्ट, वर्मी कम्पोस्ट, हरी खाद, फसल अवशेष, खलियाँ, मुर्गी की खाद, हड्डियों का चूरा या मछली की खाद – इन सभी जैविक पदार्थों को सड़ाने और पचाने का कार्य सूक्ष्मजीव ही करते हैं। ये पदार्थों को विघटित कर ह्यूमस बनाते हैं। ह्यूमस ही मिट्टी की असली ताकत है। जिस मिट्टी में जितना अधिक ह्यूमस होगा, उसकी उपजाऊ क्षमता उतनी ही अधिक होगी।
ह्यूमस बनने में समय लगता है। यह जैविक खाद और पौधों के अवशेषों के विघटन से बनता है, जिसमें करोड़ों सूक्ष्मजीव कार्य करते हैं। देशी गाय का गोबर इन सूक्ष्मजीवों के लिए उत्तम माध्यम है।
ह्यूमस में मुख्य रूप से 60% जैविक कार्बन और 6% जैविक नाइट्रोजन होती है। इसका C:N अनुपात लगभग 10:1 होता है। ह्यूमस से मिट्टी की जल धारण क्षमता बढ़ती है और पोषक तत्वों को रोकने की शक्ति आती है।
2 पौधों को पोषक तत्व उपलब्ध कराना
सूक्ष्मजीव जैविक पदार्थों में उपस्थित पोषक तत्वों को उस रूप में बदलते हैं, जिसे पौधे आसानी से ग्रहण कर सकें। राइजोबियम जैसे जीवाणु वातावरण से नाइट्रोजन स्थिरीकरण कर पौधों को नत्रजन उपलब्ध कराते हैं। ये जीव अघुलनशील फॉस्फेट को घुलनशील बनाते हैं, मिट्टी से पोटाश मुक्त करते हैं तथा अन्य सूक्ष्म पोषक तत्वों को भी उपलब्ध कराते हैं।
3 हार्मोन एवं विटामिन का उत्पादन
सूक्ष्मजीव मिट्टी में ऐसे हार्मोन और विटामिन उत्पन्न करते हैं, जो पौधों की जड़ों के विकास में सहायक होते हैं। मजबूत जड़ें अधिक पोषक तत्व ग्रहण करती हैं, जिससे पौधा स्वस्थ बनता है।
4. मृदा संरचना में सुधार
सूक्ष्मजीव ऐसे पदार्थ बनाते हैं, जिनसे मिट्टी के कण आपस में जुड़ जाते हैं और मिट्टी भुरभुरी बनती है। इससे वायु संचार अच्छा होता है, जड़ों को ऑक्सीजन मिलती है और उनका विकास बेहतर होता है।
भूमि में सूक्ष्मजीवों की संख्या बढ़ाने के उपाय
- गोबर की खाद, कम्पोस्ट, वर्मी कम्पोस्ट, हरी खाद, मुर्गी की खाद, फसल अवशेष आदि जैविक खादों का अधिक प्रयोग करें।
- जीवामृत का नियमित उपयोग करें। यह मिट्टी की उर्वराशक्ति बढ़ाता है, पौधों को पोषण देता है और बंजर भूमि को उपजाऊ बनाता है।
- मिट्टी का pH मान 6.5 से 7.5 के बीच बनाए रखें। अम्लीय मिट्टी में चूना और क्षारीय मिट्टी में जिप्सम का प्रयोग करें।
- खेत में पानी का जमाव न होने दें।
- जैव उर्वरकों (Bio-fertilizers) का प्रयोग करें।
जैव उर्वरकों के प्रकार
नाइट्रोजन स्थिरीकरण
दलहनी फसलें – राइजोबियम
अन्य फसलें – एजोटोबैक्टर, एजोस्पाइरिलम, एसीटोबैक्टर
अजोला, नीली-हरी शैवाल
फॉस्फोरस घुलनशीलता
एस्पर्जिलस, पैनिसिलियम, स्यूडोमोनास, बैसिलस
पोटाश एवं आयरन घुलनशीलता
बैसिलस, फ्रैट्यूरिया, एसीटोबैक्टर
प्लांट ग्रोथ प्रमोटिंग राइजोबैक्टीरिया
बैसिलस, फ्लोरोसेंट स्यूडोमोनास
माइकोराइजल कवक
एक्टोमाइकोराइजा
अरबसकुलर माइकोराइजा
माइकोराइजा पौधों की जड़ों के साथ सहजीवी संबंध बनाकर पोषक तत्व और पानी के अवशोषण को बढ़ाता है।
फसल चक्र में दलहनी फसलों को शामिल करें।
अंतरवर्ती फसलें उगाएँ।
केंचुओं के लिए मल्चिंग (आच्छादन) करें, जिससे सूक्ष्म वातावरण बने।
