माल्टा और संतरे के बागों में ‘सिट्रस डिक्लाइन’ (सूखना): कारण एवं वैज्ञानिक प्रबंधन

Rajendra Kuksal
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डॉ. राजेंद्र कुकसाल, 15 जनवरी, 2026

पहाड़ी और मैदानी क्षेत्रों में नींबूवर्गीय फलों (माल्टा, संतरा, नींबू) की खेती आजीविका का मुख्य साधन है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में एक गंभीर समस्या उभरी है, जिसे हम सिट्रस डिक्लाइन (Citrus Decline) या डाइबैक (Die-back) के नाम से जानते हैं। अक्सर देखा गया है कि पौधे अपनी पूरी उम्र तय करने से पहले ही, यानी 10-15 वर्षों के भीतर ही सूखने लगते हैं। इस लेख में हम इस रोग के लक्षणों, कारणों और इसके संपूर्ण प्रबंधन की चर्चा करेंगे।

रोग के प्रमुख लक्षण

  • शीर्ष से शुरुआत: टहनियां ऊपर (शीर्ष) से नीचे की ओर सूखने लगती हैं।

  • पत्तियों का गिरना: पत्तियां समय से पहले पीली होकर गिरने लगती हैं।

  • असामान्य पुष्पन: फूल तो बहुत अधिक आते हैं, लेकिन फल बहुत कम टिकते हैं।

  • गुणवत्ता में गिरावट: फल छोटे रह जाते हैं, छिलका मोटा हो जाता है और रस की गुणवत्ता कम हो जाती है।

  • गोंद का निकलना (Gummosis): तने और शाखाओं से चिपचिपा गोंद निकलने लगता है, जिससे पौधा कमजोर होकर मर जाता है।

वाटर स्प्राउट्स डाइबैक का एक प्रमुख कारण

वाटर स्प्राउट्स के रहने देने से पेड़ का आकार खराब हो जाता है और पेड़ के बाकी हिस्सों से पोषक तत्वों की व ऊर्जा की कमी हो जाती है, बीमारियों और कीटों के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं, ऐसे प्ररोहों में फल फूल कम व छोटे आते हैं। पेड़ की नियमित रूप से जाँच करें और जैसे ही वाटर स्प्राउट्स की नई कोंपलें निकलें उन्हें शीघ्र हटा लें। डाइबैक की शुरुआत इन्हीं वाटर स्प्राउट्स से शुरू होती है। फल उत्पन्न करने वाले प्ररोह (Fruiting Shoots)- ये प्ररोह दुबले पतले, वृद्धि बहुत धीमी तथा साधारणतः धरातल के समानान्तर या लटके हुए होते हैं, इनकी पत्तियां मध्यम या छोटे आकार की होती हैं। इन प्ररोहों की कांट-छांट प्रत्येक वर्ष नहीं करना पड़ता जब इन प्ररोहों में फल उत्पन्न करने की क्षमता कम होने लगे, तब इनका कृन्तन करके अन्य प्ररोहों को विकसित किया जाता है।

 

मुख्य तने पर वाटर स्प्राउट्स

सूखने के मुख्य कारण

  1. दोषपूर्ण काट-छांट: समय पर और सही तरीके से प्रूनिंग न करना।

  2. वाटर स्प्राउट्स: तने से निकलने वाली अनावश्यक और तेजी से बढ़ने वाली कोमल शाखाएं।

  3. मिट्टी की स्थिति: अम्लीय मृदा या जल निकासी (Drainage) की उचित व्यवस्था न होना।

  4. पोषण की कमी: सूक्ष्म पोषक तत्वों (जिंक, कैल्शियम आदि) का अभाव।

  5. कीट और व्याधि: तना छेदक (Borer), कैंकर और फाइटोफ्थोरा फफूंद का प्रकोप।

प्रबंधन और सुधार के उपाय

1. पौधों की शुरुआती देखरेख (काट-छांट)

पौधे के उचित ढांचे के लिए शुरुआती वर्षों में काट-छांट अनिवार्य है:

  • मुख्य तना जमीन से 40-45 सेमी तक शाखा रहित होना चाहिए।

  • इसके ऊपर 30 सेमी की दूरी पर 3-4 मुख्य शाखाएं 40° के कोण पर अलग-अलग दिशाओं में विकसित होने दें।

  • वाटर स्प्राउट्स को हटाना: ये डाइवैक का सबसे बड़ा कारण हैं। ये कोमल और कटीली टहनियां पौधे की सारी ऊर्जा सोख लेती हैं। इन्हें देखते ही तुरंत काट देना चाहिए।

2. शीतकालीन देखभाल (दिसंबर से मार्च)

  • स्वच्छता: सूखी, रोगग्रस्त टहनियों और पुराने वाटर स्प्राउट्स को काटकर जला दें।

  • कीट नियंत्रण: तना छेदक (Borer) के छिद्रों को तार से साफ कर, मिट्टी का तेल या पेट्रोल में भीगी रुई डालकर मिट्टी से बंद कर दें।

  • उपचार: गोंद वाले स्थान को खुरचकर साफ करें और बोर्डो पेस्ट लगाएं।

  • छिड़काव: काट-छांट के बाद कॉपर ऑक्सीक्लोराइड (3 ग्राम/लीटर) या बोर्डो मिश्रण का छिड़काव करें। तने पर जमीन से 60 सेमी तक बोर्डो पेस्ट का लेप लगाएं।

3. ग्रीष्मकालीन एवं वर्षाकालीन पोषण (अप्रैल से अक्टूबर)

रोगग्रस्त पौधों के पुनरुद्धार के लिए प्रति वृक्ष निम्नलिखित खाद का मिश्रण जून-जुलाई और अक्टूबर में दें:

सामग्री मात्रा (प्रति वृक्ष)
गोबर की खाद 40 किग्रा
नीम खली 4.5 किग्रा
यूरिया 1 किग्रा
सिंगल सुपर फॉस्फेट 800 ग्राम
म्यूरेट ऑफ पोटाश 500 ग्राम
ट्राइकोडर्मा 150 ग्राम
चूना 1 किग्रा
  • पर्णीय छिड़काव: नई पत्तियां आने पर यूरिया (10 ग्राम/लीटर), जिंक सल्फेट (2 ग्राम/लीटर) और कैल्शियम नाइट्रेट (5 ग्राम/लीटर) का छिड़काव 20 दिनों के अंतराल पर करें।

4. रोग एवं कीट नियंत्रण

  • कीट: नए कल्ले निकलते समय एमिडाक्लोरप्रिड (1 मिली/लीटर) का छिड़काव करें।

  • फफूंद: फाइटोफ्थोरा के लिए 1% बोर्डो मिश्रण और कैंकर के लिए स्ट्रेप्टोसाइक्लिन (500 PPM) का प्रयोग करें।

बोर्डो मिश्रण (Bordeaux Mixture) बनाने की विधि

यह फफूंदनाशक बागवानों के लिए सबसे सस्ता और प्रभावी उपाय है:

  1. 80 ग्राम नीला थोथा (कॉपर सल्फेट) और 80 ग्राम अनबुझा चूना अलग-अलग 5-5 लीटर पानी में घोलें।

  2. दोनों घोलों को एक साथ तीसरे बर्तन (प्लास्टिक या लकड़ी का) में मिलाते हुए डंडे से हिलाएं।

  3. नोट: मिश्रण बनाने के लिए धातु के बर्तनों का प्रयोग न करें।

निष्कर्ष: यदि बागवान वैज्ञानिक विधि से पोषक तत्वों का प्रबंधन और समय पर काट-छांट करें, तो बगीचों को सूखने से बचाया जा सकता है। पुराने बागों के जीर्णोद्धार के लिए आप उद्यान विभाग की योजनाओं का भी लाभ उठा सकते हैं।

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