डॉ. राजेंद्र कुकसाल, 27 फरवरी, 2026: लहसुन रबी मौसम की एक महत्वपूर्ण मसाला फसल है, जो सामान्यतः अप्रैल-मई में तैयार होती है। इसकी मांग एवं खपत पूरे वर्ष बनी रहती है। फसल कटाई के समय बाजार में आवक अधिक होने के कारण कीमत कम मिलती है, किंतु यदि लहसुन का वैज्ञानिक तरीके से 5-6 माह तक सुरक्षित भंडारण किया जाए, तो सितंबर- अक्टूबर में बेहतर मूल्य प्राप्त किया जा सकता है।
लहसुन के भंडारण में मुख्य समस्या अंकुरण (Sprouting), वजन में कमी (Weight loss), सड़न (Rotting) एवं फफूंदजनित रोग हैं। अतः सही तापमान, आर्द्रता और हवादार व्यवस्था द्वारा इन हानियों को कम किया जा सकता है।
1 कटाई का सही समय – भंडारण हेतु लहसुन की कटाई तभी करें जब, पत्तियाँ 60-70% पीली हो जाएँ। बल्ब पूरी तरह विकसित एवं सख्त हों। बाहरी छिलका सूखा एवं परिपक्व हो, अधपकी फसल भंडारण में जल्दी खराब होती है, जबकि अधिक पकने पर बल्ब फटने लगते हैं जिससे सड़न बढ़ती है।
2 क्योरिंग (Curing) / सुखाने की वैज्ञानिक प्रक्रिया- कटाई के बाद लहसुन को तुरंत धूप में नहीं सुखाना चाहिए क्योरिंग हेतु , पौधे सहित लहसुन को 10-15 दिन तक छाया में फैलाकर सुखाएँ, इस दौरान बाहरी छिलका मजबूत होता है गर्दन (Neck) अच्छी तरह सूखती है, सड़न एवं भंडारण हानि कम होती है, क्योरिंग का उद्देश्य बल्ब की नमी को कम करके उसे भंडारण योग्य बनाना होता है।
3 भंडारण के लिए उपयुक्त बल्बों का चयन- भंडारण के लिए ऐसे बल्ब लें जो,स्वस्थ, ठोस व पूर्ण विकसित हों चोट लगे, कटे, सड़े या फटे बल्ब न हों ,बहुत छोटे या अधिक बड़े बल्ब अलग कर दें (ग्रेडिंग करें) ग्रेडिंग से रोग फैलने की संभावना कम होती है।
लहसुन के सुरक्षित भंडारण हेतु 20- 25 °C तापमान एवं आर्द्रता (Relative Humidity) आदर्श RH: 60–70% उपयुक्त पाया जाता है , यदि RH 75% से अधिक हो जाए तो फफूंद, सड़न एवं अंकुरण तेजी से बढ़ता है।
कैसे करें लहसुन का भंडारण
भंडारण के लिए ऐसे बल्बों का चयन करें जो छाया में अच्छी तरह सुखाए गए, साफ तथा स्पर्श करने पर ठोस हों। इन बल्बों को पूरे पौधे सहित ठंडे, सूखे एवं हवादार भंडारण कक्ष में सामान्य कमरे के तापमान पर 5-6 माह तक सुरक्षित रखा जा सकता है। ध्यान रखें कि भंडारण स्थल पर अधिक नमी न हो, अन्यथा बल्बों में सड़न एवं फफूंद लगने की संभावना बढ़ जाती है।भंडारण से पहले बल्बों की वर्गीकृत (ग्रेडिंग) कर लें तथा 20-25 पौधों को पत्तियों सहित शीर्ष भाग से बंडलों में बाँध दें। शीर्ष भाग को तीन खंडों में विभाजित कर उन्हें कसकर एक-दूसरे में बुनकर भी रखा जा सकता है। तैयार बंडलों को 15 दिनों तक छाया में सीधा खड़ा करके सुखाएँ। इसके बाद इन्हें ठंडे, सूखे एवं हवादार कक्ष/कमरे में डंडों पर लटका दें।
यह लहसुन भंडारण की एक पारंपरिक एवं प्रभावी विधि है, जिसका उपयोग आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में किसान अपनी लहसुन उपज को 5-6 माह तक सुरक्षित रखने हेतु करते हैं। आगामी वर्ष हेतु बीज के लिए लहसुन का भंडारण भी किसान इसी विधि से सफलतापूर्वक करते हैं।
