डॉ. राजेंद्र कुकसाल, 09 मार्च, 2026ः गर्मी व वर्षा ऋतु में लगभग हर घर के पास लौकी, तोरई, चचिंडा, ककड़ी, करेला तथा कद्दू जैसी बेल वाली सब्जियाँ देखने को मिलती हैं। कई कृषक इन फसलों की व्यावसायिक खेती भी कर रहे हैं। अधिक उत्पादन हेतु अनुकूल जलवायु, जीवांशयुक्त उपजाऊ भूमि, उन्नत किस्म के बीज का चयन, उचित समय पर बुवाई, संतुलित उर्वरक एवं पोषक तत्वों का प्रयोग, उचित परागण, खरपतवार नियंत्रण, समय पर निराई-गुड़ाई, संतुलित सिंचाई प्रबंधन तथा कीट-रोगों से सुरक्षा आवश्यक है। इसके अतिरिक्त आवश्यकता अनुसार सहारा (स्टेकिंग/मचान) एवं समय-समय पर उचित कटाई-छंटाई (प्रूनिंग) करने से बेल वाली सब्जियों में अधिक उपज एवं बेहतर आर्थिक लाभ प्राप्त किया जा सकता है।
पुष्प संरचना एवं फलन की प्रक्रिया-
कद्दू वर्गीय फसलें द्विलिंगी (Monoecious) होती हैं, अर्थात एक ही पौधे पर नर एवं मादा पुष्प अलग- अलग लगते हैं (एकलिंगी पुष्प)। मादा पुष्प के नीचे छोटा फल दिखाई देता है। नर पुष्प सीधी डंडी पर लगा होता है।
फल का विकास तभी संभव है जब नर पुष्प का पराग, मादा पुष्प के वर्तिकाग्र पर पहुँचकर परागण एवं निषेचन करे।
प्रारंभिक अवस्था में मुख्य तने (1st generation branch) तथा उससे निकली शाखाओं (2nd generation branch) पर प्रायः नर पुष्प ही आते हैं। मादा पुष्प सामान्यतः 3rd generation की शाखाओं पर विकसित होते हैं। इन फसलों में नर एवं मादा पुष्पों का अनुपात लगभग 9:1 होता है। 3G कटिंग तकनीक द्वारा मादा पुष्पों की संख्या बढ़ाई जा सकती है, जिससे उपज में उल्लेखनीय वृद्धि होती है।
3G कटिंग कैसे करें-
1 प्रारंभिक अवस्था में बीज अंकुरण के बाद पौधे की प्रारंभिक चार पत्तियों तक कोई भी साइड शाखा न निकलने दें। यदि शाखा निकल आए तो उसे साफ ब्लेड से काट दें। पौधे की पूरी आयु तक नीचे की चार पत्तियों तक शाखाएँ न रहने दें।
2 भूमि या झाड़ी के सहारे चढ़ाने पर जब पौधे पर 12–14 पत्तियाँ आ जाएँ और लंबाई लगभग 2 मीटर हो जाए, तब मुख्य तने का अग्र भाग तोड़ दें। इससे पौधे की ऊर्जा मुख्य तने की वृद्धि में न लगकर द्वितीय एवं तृतीय पीढ़ी की शाखाओं के विकास में लगेगी।
3 मचान या टेरेस पर चढ़ाने पर पौधे को मचान तक बिना शाखा निकले बढ़ने दें। मचान तक पहुँचने के बाद ही मुख्य तने का अग्र भाग तोड़ें। इसके बाद मुख्य तने से 3–4 शाखाएँ (2nd generation) विकसित होने दें।
4 द्वितीय पीढ़ी की शाखाओं पर जब लगभग 12 पत्तियाँ आ जाएँ, तब उनका अग्र भाग काट दें। इनसे निकलने वाली शाखाएँ 3rd generation होंगी, जिन पर मादा पुष्प विकसित होते हैं।

विशेष सावधानियां
यदि केवल 1–2 पौधे हों, तो परागण हेतु मुख्य तने से निकली एक द्वितीय पीढ़ी की शाखा को बिना काटे बढ़ने दें, ताकि नर पुष्प उपलब्ध होते रहें।व्यावसायिक खेती में प्रत्येक 12 पौधों में से कम से कम एक पौधे पर 3G कटिंग न करें, जिससे पर्याप्त नर पुष्प मिल सकें।
पौधों को अत्यधिक घना न होने दें। शाखाओं की संख्या नियंत्रित रखें ताकि सभी भागों को पर्याप्त सूर्य प्रकाश मिले।
3G कटिंग तकनीक अपनाकर कद्दू वर्गीय बेल वाली सब्जियों में मादा पुष्पों की संख्या बढ़ाई जा सकती है, जिससे फलन एवं उपज में कई गुना वृद्धि संभव है। यह सरल, कम खर्चीली तथा प्रभावी तकनीक किसानों की आय बढ़ाने में सहायक सिद्ध हो सकती है।
