Tomato Staking and Pruning Techniques: टमाटर में समय पर किस तरह की जाए स्टेकिंग व कटाई-छंटाई, जानिए डॉ. कुकसाल से

डॉ. राजेंद्र कुकसाल बता रहे हैं, स्टेकिंग और प्रूनिंग तकनीक अपनाकर टमाटर के पौधों को बीमारियों से कैसे बचाया जा सकता है और फलों की गुणवत्ता में किस तरह सुधार किया जा सकता है। इन वैज्ञानिक विधियों के सही इस्तेमाल से कम जगह में टमाटर की कई गुना अधिक पैदावार प्राप्त करना संभव है।

Rajendra Kuksal
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डॉ. राजेंद्र कुकसाल, 09 मार्च, 2026ः अधिक उत्पादन हेतु अनुकूल जलवायु, जीवांशयुक्त उपजाऊ भूमि, उन्नत किस्म के बीज का चयन, उचित समय पर बीज की बुआई एवं पौध रोपण, सही मात्रा में उर्वरकों एवं पोषक तत्वों का प्रयोग, उचित परागण, खरपतवार नियंत्रण, आवश्यकतानुसार निराई-गुड़ाई, सिंचाई तथा फसल को कीट एवं रोगों से सुरक्षा आदि अनेक कारक महत्वपूर्ण हैं। इन सबके अतिरिक्त समय पर पौधों को सहारा देना (स्टेकिंग) एवं उचित प्रूनिंग/कटाई-छंटाई करके टमाटर की उपज को कई गुना बढ़ाया जा सकता है।

टमाटर में फूल आने के समय, अर्थात रोपण के 20–30 दिन बाद, पौधों में मिट्टी चढ़ाना एवं सहारा देना आवश्यक होता है। टमाटर की लंबी बढ़ने वाली किस्मों को विशेष रूप से सहारे की आवश्यकता होती है। पौधों को सहारा देने से फल मिट्टी एवं पानी के संपर्क में नहीं आते, जिससे फल सड़ने की समस्या नहीं होती।

स्टेकिंग के लाभ

स्टेकिंग या पौधों को सहारे के साथ ऊपर उठाने से कई लाभ होते हैं—

1 पौधे जमीन पर कम स्थान घेरते हैं, जिससे कम क्षेत्रफल में अधिक पौधों का रोपण किया जा सकता है।

2 पौधे सहारे के साथ सीधे खड़े रहने से उनमें वायु संचार बना रहता है तथा पूरे पौधे को पर्याप्त सूर्य प्रकाश मिलता है। इससे कीट एवं रोगों का प्रकोप कम होता है। भूमि से दूरी रहने के कारण मृदाजनित रोगों से भी बचाव होता है।

3 पौधों की प्रूनिंग, सिंचाई, दवाइयों का छिड़काव तथा फसल की तुड़ाई करना आसान हो जाता है।

4 अच्छी गुणवत्ता के बड़े फल प्राप्त होते हैं तथा उपज जल्दी मिलती है।

5 पौधों से लंबे समय तक उपज प्राप्त होती रहती है।

6 स्टेकिंग करने से कुल उपज में वृद्धि होती है।

स्टेकिंग कैसे करें-

टमाटर में स्टेकिंग के लिए लगभग 6 फीट ऊंचे बांस के डंडों का चयन करें। पौधों की कतार में दो-दो मीटर के अंतराल पर डंडों को लगभग एक फुट गहराई तक गाड़ें। डंडों के सहारे तार या मजबूत नायलॉन की रस्सी जमीन से लगभग 45 सेंटीमीटर की ऊंचाई पर बांधें। इसके बाद प्रत्येक एक फुट के अंतर पर तीन समानांतर रस्सियां और बांधें। कतार के दोनों सिरों पर लगे डंडों को ऊपर से रस्सी द्वारा खूंटी के सहारे कसकर तान दें, ताकि फल लगने पर रस्सी झुके नहीं। जब पौधे 45–50 सेंटीमीटर के हो जाएं, तो प्रत्येक पौधे को जमीन से 15–20 सेंटीमीटर ऊपर तने की गांठ के पास सुतली से हल्के से बांधें। इस रस्सी को पौधे के चारों ओर लपेटते हुए ऊपर की ओर ले जाएं और क्रमशः तारों/रस्सियों में फंसाते हुए सबसे ऊपर के तार से बांध दें। 10–15 दिन बाद, जैसे ही पौधा बढ़े और झुकने लगे, ऊपर बंधी रस्सी को खोलकर पुनः पौधे को रस्सी से लपेटते हुए सीधा करें। यह प्रक्रिया प्रत्येक 15–20 दिन के अंतराल पर दोहराते रहें, जब तक पौधा ऊपर के तार तक न पहुंच जाए। इसके बाद पौधे को तार से नीचे की ओर बढ़ने दें।

प्रूनिंग / कटाई-छंटाई-

बढ़वार के आधार पर टमाटर के पौधे दो प्रकार के होते हैं—

1 सीमित वृद्धि (Determinate): इनकी बढ़वार लगभग 2–3 फुट तक होती है।

2 असीमित वृद्धि (Indeterminate): इनकी बढ़वार पूरे मौसम भर होती रहती है।

अच्छे फल एवं अधिक उपज के लिए पौधों से अवांछित शाखाएं (सकर्स) एवं अतिरिक्त पत्तियां हटाना आवश्यक है, जिससे पौधे को प्राप्त पोषक तत्व फलों की वृद्धि में उपयोग हों।

सीमित वृद्धि वाले पौधों में हल्की कटाई-छंटाई की जाती है, जबकि असीमित वृद्धि वाले पौधों में नियमित रूप से छंटाई करनी पड़ती है।

प्रूनिंग करने का सही समय एवं विधि-

1 जब पौधे 30–40 सेंटीमीटर के हो जाएं, या जैसे ही सबसे नीचे की पत्तियां पीली पड़ने लगें, अथवा पौधों पर फूल दिखाई देने लगें, तभी छंटाई प्रारंभ कर दें।

2 मुख्य तने पर जैसे ही पहले फूलों का गुच्छा आए, उसके नीचे की सभी पत्तियां एवं सकर्स (मुख्य तने से निकलने वाली नई शाखाएं) धीरे-धीरे नीचे से ऊपर की ओर हटाते रहें। यह प्रक्रिया सीमित एवं असीमित, दोनों प्रकार की पौधों में करनी चाहिए। इससे मुख्य तना मजबूत होता है तथा पोषक तत्व फलों की वृद्धि में लगते हैं।

3 सकर्स को कली अवस्था में ही अंगूठे एवं पहली उंगली की सहायता से जड़ से तोड़ देना चाहिए।

4 सीमित वृद्धि वाले पौधों में बाद में अधिक प्रूनिंग की आवश्यकता नहीं होती।

5 असीमित वृद्धि वाले पौधों में बढ़वार के साथ-साथ नियमित रूप से सकर्स हटाते रहें। हालांकि सभी सकर्स हटाना आवश्यक नहीं है, इसे एक उचित रणनीति के तहत करें।

6 जिन क्षेत्रों में गर्मी अधिक पड़ती है, वहां कुछ मजबूत सकर्स छोड़ सकते हैं, जिससे पौधों को आंशिक छाया मिलती रहे।

7 छंटाई सप्ताह में एक या दो बार करें।

8 मुख्य तने से पहले फूलों के गुच्छे के ऊपर 4–5 स्वस्थ शाखाएं ही रखें तथा शेष अतिरिक्त शाखाएं हटा दें।

समय पर स्टेकिंग एवं वैज्ञानिक तरीके से प्रूनिंग करने से टमाटर की फसल स्वस्थ रहती है, रोगों का प्रकोप कम होता है, फल की गुणवत्ता सुधरती है तथा कुल उपज में उल्लेखनीय वृद्धि होती है।

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