डॉ. राजेंद्र कुकसाल, 17 मार्च, 2026ः पौधों में परागण (Pollen Transfer) की प्रक्रिया को हाथ से करने को हैंड पॉलिनेशन कहते हैं। सामान्यतः यह कार्य मधुमक्खियों, तितलियों, हवा या अन्य कीटों द्वारा स्वाभाविक रूप से हो जाता है। लेकिन कुछ परिस्थितियों में जब प्राकृतिक परागण ठीक से नहीं हो पाता, तब अच्छी फल-सेटिंग और अधिक उत्पादन के लिए हाथ से परागण करना आवश्यक हो जाता है।
हैंड पालिनेशन कब आवश्यक होता है?
1- परागण करने वाले कीटों की कमी होने पर- जब खेत में मधुमक्खी, तितली आदि परागण करने वाले कीट कम होते हैं, तब फूलों में पर्याप्त परागण नहीं हो पाता और फल बनने की संभावना कम हो जाती है।
2- ग्रीनहाउस या पॉलीहाउस में खेती के समय संरक्षित खेती (Protected Cultivation) में प्राकृतिक कीटों का आवागमन कम होता है। इसलिए टमाटर, शिमला मिर्च तथा कद्दू वर्गीय सब्जियों में कई बार हाथ से परागण करना पड़ता है।
3- नर और मादा फूल अलग- अलग होने के कारण- कद्दू वर्गीय सब्जी फसलों जैसे लौकी, तोरी, कद्दू, खीरा, करेला आदि में एक ही बेल पर नर और मादा फूल अलग- अलग होते हैं। ऐसे में कई बार बेहतर फल सेट के लिए हाथ से परागण करना लाभदायक होता है।
4- प्रतिकूल मौसम की स्थिति में- अधिक वर्षा, तेज हवा, अत्यधिक ठंड या अधिक गर्मी के कारण परागण करने वाले कीट सक्रिय नहीं रहते, जिससे प्राकृतिक परागण प्रभावित हो जाता है।
5- जब पौधों में फल-सेट कम हो- यदि पौधों में फूल तो आ रहे हों लेकिन फल नहीं बन रहे हों, तो हैंड पॉलिनेशन करके फल-सेट व उत्पादन बढ़ाया जा सकता है।
हैंड पॉलिनेशन कैसे करें?
* सुबह 6 से 9 बजे के बीच ताजा नर फूल चुनें।
* नर फूल की पंखुड़ियां हटाकर उसका पराग (Pollen) मादा फूल के वर्तिकाग्र (Stigma) पर हल्के से लगाएं।
* आवश्यकता होने पर ब्रश या कॉटन इयर-बड (स्वैब) का भी उपयोग किया जा सकता है।
हैंड पॉलिनेशन से लाभ
1.फल-सेट की संख्या बढ़ती है।
2. उत्पादन में वृद्धि होती है।
3. फल का आकार और गुणवत्ता बेहतर होती है।
